सोमवार, 22 दिसंबर 2025

बिहार में जमीन का खेल खत्म! Bihar Land Survey 2025 से बदल जाएगा मालिकाना हक, जानिए पूरा सच

 
Bihar Land Survey 2025 के तहत गांव में जमीन की मापी करते सर्वे अधिकारी और ग्रामीण

बिहार में जमीन से जुड़ा विवाद कोई नई बात नहीं है। दशकों पुराने खतियान, गलत नक्शे, रकबा गड़बड़ी और फर्जी दावों ने आम आदमी की जिंदगी मुश्किल बना दी है। ऐसे में सरकार द्वारा शुरू किया गया Bihar Land Survey 2025 राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। इस सर्वे के पूरा होते ही यह साफ हो जाएगा कि किस जमीन का असली मालिक कौन है, सीमा कहां तक है और रिकॉर्ड में क्या दर्ज होगा। यही वजह है कि यह सर्वे आम लोगों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बन गया है।

Bihar Land Survey 2025 क्या है और सरकार इसे क्यों करा रही है?

बिहार भूमि सर्वे दरअसल राज्य की हर जमीन का नया और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया है। अभी बिहार में ज्यादातर जमीनों का रिकॉर्ड 100 साल पुराना है, जो वर्तमान स्थिति से मेल नहीं खाता। कहीं जमीन का रकबा कम दर्ज है, कहीं ज्यादा, तो कहीं मालिकाना ही गलत चढ़ा हुआ है। इसी वजह से आए दिन गांव से लेकर शहर तक जमीन विवाद सामने आते हैं।

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सरकार का मानना है कि जब तक जमीन का सही सर्वे नहीं होगा, तब तक न तो विवाद खत्म होंगे और न ही डिजिटल व्यवस्था सही तरीके से लागू हो पाएगी। इस सर्वे के जरिए जमीन की मापी, सीमा निर्धारण, मालिकाना सत्यापन और रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। सरकार इसे “भविष्य की भूमि व्यवस्था की नींव” मान रही है।

जमीन सर्वे की प्रक्रिया कैसे चल रही है? जानिए पूरा सिस्टम

Bihar Land Survey को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है ताकि किसी भी जमीन मालिक के साथ अन्याय न हो। सबसे पहले गांव और मोहल्लों में सर्वे टीम पहुंचती है, जिसमें अमीन, राजस्व कर्मचारी और अन्य अधिकारी शामिल होते हैं। यह टीम जमीन की वास्तविक स्थिति देखकर मापी करती है और पुराने रिकॉर्ड से मिलान करती है।

इसके बाद एक ड्राफ्ट रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जिसे सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाता है। इस दौरान आम लोगों को मौका दिया जाता है कि वे अपने रिकॉर्ड की जांच करें। अगर किसी को सीमा, रकबा या मालिकाना में गड़बड़ी लगती है तो वह तय समय के भीतर आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्तियों की जांच के बाद सुधार किया जाता है और फिर फाइनल रिकॉर्ड प्रकाशित होता है।यही फाइनल रिकॉर्ड आगे चलकर जमीन से जुड़े हर सरकारी और कानूनी काम का आधार बनेगा। इसलिए इस प्रक्रिया को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

जमीन मालिकों को किन दस्तावेजों की जरूरत होगी? एक गलती भारी पड़ सकती है

Bihar Land Survey के दौरान सही दस्तावेज होना सबसे ज्यादा जरूरी है। जिन लोगों के पास पूरे कागजात नहीं हैं, उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। आमतौर पर सर्वे के समय ये दस्तावेज मांगे जाते हैं—पुराना खतियान, जमाबंदी, रजिस्ट्री पेपर, दाखिल-खारिज की रसीद, लगान रसीद और पहचान पत्र।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जमीन का कोई हिस्सा बंटवारे में आया है या विरासत में मिला है, तो उससे जुड़े सभी कागजात साथ रखें। कई मामलों में देखा गया है कि दस्तावेज अधूरे होने की वजह से जमीन का रकबा कम चढ़ गया या किसी दूसरे के नाम दर्ज हो गया। बाद में सुधार कराना लंबी कानूनी प्रक्रिया बन जाती है।

Bihar Land Survey 2025 से आम जनता को क्या फायदा और क्या नुकसान हो सकता है?

इस सर्वे के फायदे जितने बड़े हैं, लापरवाही का नुकसान भी उतना ही गंभीर हो सकता है। फायदे की बात करें तो जमीन विवादों में भारी कमी आएगी, रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज आसान होगा, बैंक लोन और सरकारी योजनाओं में जमीन से जुड़ी अड़चनें खत्म होंगी। जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़ा रुकेगा।

लेकिन अगर किसी ने सर्वे के समय ध्यान नहीं दिया, दस्तावेज नहीं दिखाए या ड्राफ्ट रिकॉर्ड की जांच नहीं की, तो भविष्य में वही जमीन उसके लिए सिरदर्द बन सकती है। कई मामलों में लोगों को अपनी ही जमीन साबित करने के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ यही सलाह दे रहे हैं कि सर्वे को हल्के में न लें और हर चरण में सतर्क रहें।

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