बिहार में शिक्षा को मजबूत बनाने और पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। अब कम्युनिटी लाइब्रेरी के तहत मोबाइल बुक वैन को लॉन्च किया जा रहा है, जो दूर-दराज के गांवों तक किताबें और पढ़ने की सुविधाएं पहुंचाएगी। यह कदम ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है—जहाँ लाइब्रेरी तक जाना मुश्किल था, अब लाइब्रेरी ही उनके दरवाज़े तक पहुंचेगी।
मोबाइल बुक वैन का उद्देश्य: हर गांव तक शिक्षा पहुंचाना
बिहार सरकार और विभिन्न स्थानीय निकायों का मकसद है कि राज्य के हर हिस्से में शिक्षा, ज्ञान और किताबें आसानी से उपलब्ध हों।
इस योजना में—
गांवों और पंचायतों में निर्धारित रूट पर वैन पहुंचेगी
बच्चों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और आम पाठकों के लिए किताबें दी जाएंगी
महिला समूहों और युवा क्लबों को भी विशेष प्राथमिकता
यह मॉडल उन जिलों में खास असर दिखाएगा, जहाँ अभी भी लाइब्रेरी की पहुँच कम है।
कौन-कौन सी किताबें मिलेंगी?
वैन में ऐसी किताबें रखी जाएँगी जो सभी आयु-वर्ग के लिए उपयोगी हों।
इनमें शामिल हैं—
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी वाली किताबें
कहानी, उपन्यास, कविता संग्रह
कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सामग्री
बच्चों के लिए रंगीन एवं शैक्षणिक पुस्तकें
इसके अलावा, डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ वैन में ई-लर्निंग टैबलेट और ऑडियो बुक्स भी शामिल की जाएँगी।
पंजीकरण व उपयोग: पूरी तरह निःशुल्क सेवा
मोबाइल बुक वैन के माध्यम से किताबें लेने के लिए किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी।
प्रक्रिया ऐसी होगीवैन आने पर गाँव का व्यक्ति खुद का नाम दर्ज कराएगा
आधार या स्थानीय पहचान पत्र दिखाकर सदस्यता मिलेगी
किताब 7–15 दिनों की अवधि के लिए दी जाएगी
समय पर वापस करने पर अगली पुस्तक मिल सकेगी
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है—पढ़ने की आदत को बढ़ाना और ग्रामीण शिक्षा को मजबूत करना।
युवा व छात्रों में उत्साह, जिले-जिले में मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया
जिन जिलों में इस सेवा की शुरुआत हो चुकी है, वहाँ छात्रों का उत्साह देखने लायक है।
कई पंचायतों में युवाओं ने वैन को ज्ञान का “चलता–फिरता पुस्तकालय” बताया है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें