सोमवार, 5 जनवरी 2026

e-PDS पर अब AI मशीन से मिलेगा राशन! बिना लाइन, बिना कटौती अनाज देने की नई व्यवस्था शुरू


देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब e-PDS सिस्टम के तहत गरीबों और राशन कार्डधारकों को AI (Artificial Intelligence) आधारित मशीन से अनाज दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ राशन वितरण तेज होगा, बल्कि वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों, फर्जी लाभार्थियों और कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी।

ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बस्तियों तक, अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि तय मात्रा से कम अनाज दिया जाता है या फिर अंगूठा न लग पाने के कारण गरीब परिवारों को राशन से वंचित कर दिया जाता है। AI मशीन आधारित e-PDS सिस्टम इन सभी समस्याओं का समाधान बनने की कोशिश कर रहा है।

क्या है AI आधारित e-PDS मशीन और कैसे काम करती है?

AI मशीन एक स्मार्ट डिजिटल डिवाइस है, जिसे सीधे e-PDS पोर्टल और राज्य सरकार के सर्वर से जोड़ा गया है । जब कोई लाभार्थी राशन लेने जाता है, तो मशीन उसकी पहचान आधार आधारित बायोमेट्रिक, फेस रिकग्निशन या OTP सिस्टम से सत्यापित करती है।

पहचान सत्यापित होते ही मशीन खुद यह तय करती है कि लाभार्थी को कितनी मात्रा में गेहूं, चावल या अन्य अनाज मिलना है। इसके बाद मशीन से ही अनाज निकाला जाता है, जिससे डीलर द्वारा कटौती की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है।

AI तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मशीन डेटा एनालिसिस के आधार पर फर्जी कार्ड, डुप्लीकेट एंट्री और असामान्य वितरण पैटर्न को खुद पहचान लेती है। इससे सरकार को यह जानने में आसानी होती है कि कहां गड़बड़ी हो रही है।

राशन कार्डधारकों को क्या होंगे सीधे फायदे?

AI मशीन से अनाज मिलने का सबसे बड़ा लाभ आम जनता को होगा।पहला फायदा यह कि पूरी मात्रा में अनाज मिलेगा, क्योंकि मशीन तय यूनिट से कम या ज्यादा अनाज नहीं दे सकती।
दूसरा, बुजुर्गों और मजदूरों के लिए यह सिस्टम राहत लेकर आया है। कई बार उंगलियों के निशान न मिलने से उन्हें राशन नहीं मिल पाता था, लेकिन अब फेस रिकग्निशन और वैकल्पिक पहचान व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।तीसरा बड़ा फायदा यह है कि राशन वितरण का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रहेगा। लाभार्थी यह जान सकेगा कि कब, कितना और किस दुकान से अनाज मिला। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों का निपटारा भी आसान होगा।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सम्मान और भरोसे का सवाल भी है।

सरकार का उद्देश्य: कालाबाजारी पर लगाम और सिस्टम में भरोसा

सरकार लंबे समय से PDS सिस्टम में सुधार की कोशिश कर रही है। AI आधारित e-PDS मशीनों का मकसद सिर्फ तकनीक लाना नहीं, बल्कि राशन माफिया और बिचौलियों की भूमिका खत्म करना है।डेटा के जरिए सरकार यह देख पाएगी कि किस इलाके में कितना अनाज जा रहा है और कितना वितरित हो रहा है। अगर कहीं गड़बड़ी होती है, तो AI सिस्टम खुद अलर्ट भेज सकता है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से करोड़ों रुपये के अनाज की बचत होगी, जो अब सही लाभार्थियों तक पहुंचेगा। भविष्य में इसे पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।

किन राज्यों में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट और आगे क्या?

फिलहाल कई राज्यों में AI आधारित e-PDS मशीन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां यह सिस्टम लागू हुआ है, वहां शिकायतों में कमी आई है और राशन वितरण पहले से ज्यादा व्यवस्थित हुआ है।

आने वाले समय में सरकार इसे मोबाइल नेटवर्क, ऑफलाइन मोड और स्थानीय भाषा सपोर्ट के साथ और मजबूत बनाने की तैयारी में है, ताकि नेटवर्क की समस्या के कारण किसी गरीब को राशन से वंचित न होना पड़े।

निष्कर्ष

AI मशीन से e-PDS पर अनाज वितरण भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो गरीबों का हक उन्हें पूरा मिलेगा और वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाएं इतिहास बन सकती हैं।


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