बुधवार, 27 नवंबर 2024

PM MODI: पीएम मोदी संविधान दिवस पर संविधान को लेकर ये क्या बोल गए

 पीएम मोदी :संविधान दिवस 2024 पर पीएम मोदी का संबोधन, भारतीय लोकतंत्र और संविधान की महिमा का जश्न


संविधान दिवस, जिसे भारत में 26 नवंबर को मनाया जाता है, भारतीय लोकतंत्र की नींव और देश की विविधता को सम्मान देने का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की मूल भावनाओं और उसके आदर्शों की चर्चा करते हुए देशवासियों को संबोधित किया। उनके विचारों ने संविधान के महत्व को न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी का संविधान दिवस पर संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान को "देश की आत्मा" और "लोकतंत्र का जीवंत दस्तावेज़" करार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल कानूनों और नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षक है।
उन्होंने संविधान के निर्माण में योगदान देने वाले संविधान निर्माताओं को याद किया, विशेष रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका को सराहा। पीएम मोदी ने कहा:
“हमारा संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह हमें अपने कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में यह संतुलन बेहद जरूरी है।”

संविधान के सिद्धांत और आधुनिक भारत

प्रधानमंत्री ने संविधान के पांच प्रमुख स्तंभों – संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, और गणराज्य – को भारतीय समाज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि ये स्तंभ केवल आदर्श नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी हैं, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण तेजी से हो रहे हैं, संविधान हमारे देश को नई चुनौतियों का सामना करने और अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है।

पीएम मोदी ने संविधान दिवस पर अपने संबोधन में नागरिकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी लोकतंत्र की सफलता का आधार है। उन्होंने कहा:

“हम अपने अधिकारों की मांग करते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अधिकार तभी सुरक्षित हैं जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।”

'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की अवधारणा को संविधान का मूल विचार बताया। उन्होंने भारत की विविधता में एकता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संविधान ही है जिसने भारत को इतनी विविधता के बावजूद एकजुट रखा है। डिजिटल इंडिया के युग में संविधान की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में संविधान की भावना मदद करती है। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा, और डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा संविधान के माध्यम से ही सुनिश्चित हो सकती है। पीएम मोदी ने संविधान दिवस को युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवा संविधान को केवल एक दस्तावेज के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक प्रेरणास्त्रोत मानें। उन्होंने कहा: “नए भारत के निर्माण में हमारी युवा पीढ़ी को संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारना होगा।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत का संविधान न केवल देश की आंतरिक एकता को मजबूत करता है, बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की पहचान को भी स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान की शक्ति ने विश्व मंच पर भारत को मजबूती प्रदान की है।

समारोह की प्रमुख झलकियां भारत रत्न डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि, प्रधानमंत्री ने संसद भवन में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस वर्ष संविधान की दुर्लभ प्रतियों और दस्तावेजों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। संविधान दिवस पर विभिन्न नेताओं और विद्वानों ने "भारतीय लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्य" पर संवाद कियापहली बार यह समारोह नए संसद भवन में आयोजित हुआ, जो भारतीय लोकतंत्र की समकालीनता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस 2024 के अवसर पर अपने संबोधन में भारतीय संविधान के आदर्शों को एक बार फिर जीवंत किया। उन्होंने इसे न केवल देश की प्रगति का आधार बताया, बल्कि हर नागरिक को इसके प्रति जागरूक और प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया संविधान दिवस केवल एक औपचारिक दिन नहीं है, बल्कि यह भारत के संविधान के प्रति हमारे सम्मान और इसके आदर्शों को अपनाने का दिन है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश देशवासियों को प्रेरित करता है कि वे संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारें और एक समृद्ध, सशक्त, और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में योगदान दें।

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