पीएम मोदी :संविधान दिवस 2024 पर पीएम मोदी का संबोधन, भारतीय लोकतंत्र और संविधान की महिमा का जश्न
संविधान दिवस, जिसे भारत में 26 नवंबर को मनाया जाता है, भारतीय लोकतंत्र की नींव और देश की विविधता को सम्मान देने का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की मूल भावनाओं और उसके आदर्शों की चर्चा करते हुए देशवासियों को संबोधित किया। उनके विचारों ने संविधान के महत्व को न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी रेखांकित किया।
पीएम मोदी का संविधान दिवस पर संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान को "देश की आत्मा" और "लोकतंत्र का जीवंत दस्तावेज़" करार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल कानूनों और नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षक है।
उन्होंने संविधान के निर्माण में योगदान देने वाले संविधान निर्माताओं को याद किया, विशेष रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका को सराहा। पीएम मोदी ने कहा:
“हमारा संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह हमें अपने कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में यह संतुलन बेहद जरूरी है।”
संविधान के सिद्धांत और आधुनिक भारत
प्रधानमंत्री ने संविधान के पांच प्रमुख स्तंभों – संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, और गणराज्य – को भारतीय समाज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि ये स्तंभ केवल आदर्श नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी हैं, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण तेजी से हो रहे हैं, संविधान हमारे देश को नई चुनौतियों का सामना करने और अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है।
पीएम मोदी ने संविधान दिवस पर अपने संबोधन में नागरिकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी लोकतंत्र की सफलता का आधार है। उन्होंने कहा:
“हम अपने अधिकारों की मांग करते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अधिकार तभी सुरक्षित हैं जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।”

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