मकर संक्रांति भारत के सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ग्रामीण भारत में मकर संक्रांति को फसल कटाई के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। किसान नई फसल के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना, स्नान-दान, तिल और गुड़ का सेवन विशेष पुण्यकारी माना जाता है।आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में तिल-गुड़ शरीर को ऊर्जा और गर्मी प्रदान करता है।
पतंगबाजी, तिल-गुड़ और सामाजिक एकता का संदेश
मकर संक्रांति की सबसे खूबसूरत परंपरा है पतंग उड़ाना। गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में यह पर्व रंग-बिरंगी पतंगों के बिना अधूरा माना जाता है।
“तिल-गुड़ खाइए और मीठा-मीठा बोलिए” — यह परंपरा सामाजिक सौहार्द और आपसी प्रेम का प्रतीक है।
आज के डिजिटल युग में भी यह त्योहार परिवार और समाज को जोड़ने का काम करता है। लोग मोबाइल और सोशल मीडिया से हटकर एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाता है।
पोंगल 2026: दक्षिण भारत का धन्यवाद उत्सव
पोंगल तमिलनाडु और दक्षिण भारत का प्रमुख पर्व है, जो चार दिनों तक मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य, प्रकृति और पशुओं को समर्पित होता है।
भोगी पोंगल – पुराने सामान त्यागकर नए जीवन की शुरुआत
सूर्य पोंगल – सूर्य देव की पूजा और नए चावल से पोंगल बनाना
मट्टू पोंगल – गाय-बैलों की पूजा
कन्या पोंगल – पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप

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