शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

LPG Price Increase 2026: गैस महंगी होते ही छोटे कारोबारियों पर संकट, बढ़ेगा खाने-पीने का दाम?

 


नए साल 2026 की शुरुआत आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरी नहीं रही। साल के पहले ही महीने में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार में हलचल मचा दी है। खासकर वे छोटे कारोबारी, जिनका पूरा व्यवसाय गैस पर निर्भर है, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान, चाय-नाश्ते की दुकान और कैटरिंग सर्विस से जुड़े लोग अब बढ़ती लागत को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं।

हालांकि सरकार ने साफ किया है कि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से इसका अप्रत्यक्ष असर आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है। छोटे कारोबारी न तो तुरंत अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकते हैं और न ही लंबे समय तक नुकसान सहने की स्थिति में हैं। ऐसे में 2026 की यह पहली महंगाई कई सवाल खड़े कर रही है।

कमर्शियल LPG की कीमत बढ़ने से किन छोटे कारोबारियों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि एक दिन में कई सिलेंडर खर्च हो जाते हैं। ऐसे में हर सिलेंडर पर बढ़ी कीमत उनके मासिक खर्च को हजारों रुपये तक बढ़ा देती है। ढाबा और स्ट्रीट फूड वेंडर, जो पहले ही कम मुनाफे पर काम कर रहे थे, अब सबसे ज्यादा दबाव में हैं। चाय, समोसा, कचौरी, जलेबी, पकौड़े जैसी छोटी दुकानों का पूरा संचालन गैस पर निर्भर होता है।

मिठाई दुकानों और बेकरी कारोबार में भी गैस की खपत काफी ज्यादा होती है। त्योहारों और शादी के सीजन में जहां पहले अच्छी कमाई हो जाती थी, वहीं अब लागत बढ़ने से मुनाफा घटने की आशंका है। कैटरिंग और टिफिन सर्विस से जुड़े लोग भी परेशान हैं, क्योंकि वे पहले से तय रेट पर काम करते हैं और अचानक बढ़ी लागत को ग्राहक पर डालना आसान नहीं होता।छोटे व्यापारियों का कहना है कि बड़े होटल और ब्रांडेड रेस्टोरेंट तो किसी तरह कीमतें बढ़ाकर संतुलन बना लेते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए यह विकल्प तुरंत संभव नहीं होता। ग्राहक सीमित बजट में आता है और थोड़ी सी कीमत बढ़ते ही दूसरी दुकान की ओर रुख कर लेता है।

लागत बढ़ने का असर: मुनाफा घटा या ग्राहकों पर बढ़ा बोझ

एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे बढ़ी हुई लागत को कैसे संभालें। अधिकतर दुकानदारों का कहना है कि 2025 में ही कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ चुकी थीं। आटा, दाल, तेल, सब्जी, चीनी, दूध और मसालों के दाम पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। इसके साथ ही बिजली का बिल, दुकान का किराया और कर्मचारियों की मजदूरी भी लगातार बढ़ रही है।

अब जब कमर्शियल गैस महंगी हो गई है, तो कुल खर्च और बढ़ गया है। ऐसे में कारोबारी या तो अपना मुनाफा कम कर रहे हैं या फिर मजबूरी में कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कई जगहों पर चाय, नाश्ता, थाली और मिठाइयों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी शुरू भी हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे आम लोगों की थाली पर भी दिखेगा। होटल का खाना, बाहर का नाश्ता और मिठाइयां महंगी हो सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ेगा और बाजार में मांग घटने का खतरा भी रहेगा।

कुछ छोटे कारोबारी वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रहे हैं, जैसे सीमित समय तक दुकान खोलना, मेन्यू में बदलाव करना या गैस की खपत कम करने के तरीके अपनाना। हालांकि ये उपाय स्थायी समाधान नहीं हैं और लंबे समय तक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।

सरकार से राहत की उम्मीद और 2026 में छोटे कारोबार का भविष्य

एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद देशभर के छोटे व्यापारी संगठन सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि छोटे कारोबार देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। व्यापार संगठनों की मांग है कि छोटे कारोबारियों के लिए कमर्शियल LPG पर विशेष सब्सिडी दी जाए या फिर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाए।

कई संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि छोटे होटल, ढाबा और स्ट्रीट वेंडर को अलग श्रेणी में रखकर राहत दी जाए, ताकि बड़े और छोटे कारोबारियों के बीच संतुलन बना रहे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में कई छोटे कारोबार बंद होने की कगार पर आ सकते हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर और वैश्विक हालात का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। अगर हालात अनुकूल नहीं रहे, तो आने वाले समय में और दबाव देखने को मिल सकता है।LPG Price Increase 2026 ने छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कमर्शियल गैस महंगी होने से न सिर्फ व्यापार की लागत बढ़ी है, बल्कि इसका असर धीरे-धीरे आम लोगों तक भी पहुंच सकता है। आने वाले समय में सरकार के फैसले और वैश्विक हालात यह तय करेंगे कि छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी या महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।

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