इंटरमीडिएट और मैट्रिक परीक्षा से जुड़ा एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस बार 20 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा फॉर्म नहीं भरा, जबकि उन्होंने पहले रजिस्ट्रेशन जरूर कराया था। रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फॉर्म के आंकड़ों की तुलना के बाद यह जानकारी सामने आई है, जिससे शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि जिलेवार आंकड़ों के विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ है कि बड़ी संख्या में परीक्षार्थी परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए। इसका असर सीधे परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या पर पड़ा है।
इंटर परीक्षा में घटे परीक्षार्थी, सबसे ज्यादा गिरावट आर्ट्स में
इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल परीक्षार्थियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार:
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इंटर में पहले 69,007 छात्र-छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था
लेकिन परीक्षा फॉर्म भरने वालों की संख्या घटकर 58,344 रह गई
यानी करीब 10,600 से अधिक छात्र परीक्षा से बाहर हो गए
स्ट्रीम वाइज स्थिति देखें तो:
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आर्ट्स में सबसे ज्यादा 36,815 छात्र
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साइंस में 19,524 छात्र
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कॉमर्स में 2,686 छात्र
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वोकेशनल में मात्र 19 छात्र शामिल हुए
इससे साफ है कि आर्ट्स संकाय में सबसे ज्यादा छात्र परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके।
मैट्रिक परीक्षा में भी 20 हजार से ज्यादा छात्र बाहर
मैट्रिक परीक्षा की स्थिति भी कुछ अलग नहीं रही।
जानकारी के अनुसार:
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रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्रों की संख्या 67 हजार से अधिक थी
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लेकिन अंतिम रूप से परीक्षा फॉर्म भरने वाले छात्र केवल 34,405 ही रह गए
परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों में:
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पहली पाली में छात्राओं की संख्या 15,114
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दूसरी पाली में छात्राओं की संख्या 15,830
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कुल मिलाकर लड़कियों की संख्या 17,778 और लड़कों की संख्या 18,575 बताई गई है
यह अंतर शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।
परीक्षा फॉर्म नहीं भरने के पीछे ये कारण आए सामने
कुछ छात्रों की परीक्षा की तैयारी पूरी नहीं होना
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स्कूल स्तर पर सही मार्गदर्शन का अभाव
पहले से ही एक-दो विषयों में फेल होने का डर
- बार-बार मौका मिलने के बावजूद फॉर्म न भरना
अधिकारियों का कहना है कि कई छात्रों ने जानबूझकर परीक्षा से दूरी बना ली, जबकि कई छात्र अंतिम तिथि चूक गए।
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